Description
काइनीसियोलॉजी और बायोमैकेनिक्स मानव शरीर की गति को वैज्ञानिक दृष्टिकोण से समझना खेल विज्ञान (Sports Science) का एक अत्यंत महत्वपूर्ण क्षेत्र है। आधुनिक समय में खेलों का स्वरूप निरंतर विकसित हो रहा है और खिलाड़ियों के प्रदर्शन को बेहतर बनाने के लिए वैज्ञानिक सिद्धांतों का उपयोग अत्यधिक आवश्यक हो गया है। इसी संदर्भ में काइनेजियोलॉजी (Kinesiology) और बायोमैकेनिक्स (Biomechanics) का अध्ययन विशेष महत्व रखता है। काइनेजियोलॉजी मानव शरीर की गति का अध्ययन है, जबकि बायोमैकेनिक्स उन यांत्रिक सिद्धांतों का अध्ययन करता है जिनके आधार पर शरीर की विभिन्न गतिविधियाँ संपन्न होती हैं। प्रस्तुत पाठ्यपुस्तक “Kinesiology and Biomechanics” शारीरिक शिक्षा के विद्यार्थियों, खेल प्रशिक्षकों, खिलाड़ियों तथा शोधकर्ताओं के लिए तैयार की गई है। इस पुस्तक का उद्देश्य मानव शरीर की गतियों को वैज्ञानिक रूप से समझाना तथा खेलों में उनके व्यावहारिक अनुप्रयोग को स्पष्ट करना है। पुस्तक में प्रयुक्त भाषा सरल, स्पष्ट और विद्यार्थियों के स्तर के अनुरूप रखी गई है ताकि पाठक विषयवस्तु को आसानी से समझ सकें। इस पुस्तक को चार प्रमुख इकाइयों (Units) में व्यवस्थित किया गया है। प्रथम इकाई में काइनेजियोलॉजी और स्पोर्ट्स बायोमैकेनिक्स की अवधारणा, उनकी परिभाषा, महत्व तथा मूलभूत शब्दावली का वर्णन किया गया है। साथ ही अक्ष (Axes), तल (Planes), गुरुत्व केंद्र (Centre of Gravity), संतुलन (Equilibrium) तथा गुरुत्व रेखा (Line of Gravity) जैसे महत्वपूर्ण सिद्धांतों को भी स्पष्ट किया गया है। द्वितीय इकाई में शरीर रचना विज्ञान (Anatomy) और शरीर क्रिया विज्ञान (Physiology) के मूलभूत सिद्धांतों का अध्ययन प्रस्तुत किया गया है। इसमें जोड़ों (Joints) और मांसपेशियों (Muscles) का वर्गीकरण, मांसपेशी संकुचन के प्रकार, सही आसन (Posture) का महत्व तथा एंगल ऑफ पुल, ऑल ऑर नन लॉ और रेसिप्रोकल इनरवेशन जैसे महत्वपूर्ण सिद्धांतों का वर्णन किया गया है। तृतीय इकाई मानव गति की काइनेमेटिक्स और काइनेटिक्स से संबंधित है। इसमें रेखीय एवं कोणीय गति के सिद्धांत जैसे दूरी, विस्थापन, वेग, त्वरण, जड़त्व, संवेग, घर्षण तथा घूर्णजड़त्व आदि का अध्ययन किया गया है, जिससे मानव गति के वैज्ञानिक आधार को समझा जा सके। चतुर्थ इकाई में यांत्रिक अवधारणाओं (Mechanical Concepts) जैसे बल, लीवर, न्यूटन के गति नियम तथा प्रक्षेप्य गति का अध्ययन किया गया है। साथ ही इन सिद्धांतों के खेल गतिविधियों में होने वाले व्यावहारिक उपयोग को भी सरल उदाहरणों के माध्यम से समझाया गया है। इस पुस्तक को तैयार करते समय विद्यार्थियों की आवश्यकताओं, विश्वविद्यालयों के पाठ्यक्रम तथा प्रतियोगी परीक्षाओं की दृष्टि से विषयवस्तु को व्यवस्थित किया गया है। आशा है कि यह पुस्तक शारीरिक शिक्षा के विद्यार्थियों, खिलाड़ियों और प्रशिक्षकों के लिए उपयोगी सिद्ध होगी तथा उन्हें खेलों की वैज्ञानिक समझ विकसित करने में सहायता प्रदान करेगी।





